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क्या विटामिन D की कमी के कारण कोरोना मरीजों में दिखते हैं गंभीर लक्षण?

कोरोना वायरस (Coronavirus) का कहर फैला तो लगभग सारे देशों में है लेकिन मृत्युदर (Death Rate) में काफी फर्क दिख रहा है. इस पर वैज्ञानिक लगातार रिसर्च कर रहे हैं कि किन वजहों से वायरस किसी के लिए जानलेवा साबित होता है. इसी दौरान सामने आया कि विटामिन डी कोरोना से लड़ने के लिए काफी जरूरी है. एक्सपर्ट्स ने पाया कि जिन देशों में कोरोना के कारण ज्यादा मौतें हो रही हैं, वहां के लोगों में विटामिन डी की काफी कमी है. वहीं कई देशों में यही विटामिन रक्षा कवच बनकर आया.

क्या कहती है स्टडी?
ये जानकारी यूरोपीय वैज्ञानिकों की एक टीम के अध्ययन के बाद सामने आई. आयरिश मेडिकल जर्नल में छपी इस स्टडी में वैज्ञानिकों ने बताया है कि कैसे ये विटामिन शरीर में वायरल लोड कम कर देता है. यूरोपीय देशों के लोगों के शरीर में विटामिन-डी की स्टडी के लिए 1999 से डाटा निकालकर उसका एनालिसिस किया गया. विटामिन डी के इस पिछले डाटा को वर्तमान मरीजों के डाटा से मिलाया गया. इस दौरान सामने आया कि जिन मरीजों के शरीर में इसकी मात्रा अच्छी है, वो कोरोना संक्रमित तो हुए लेकिन कोई गंभीर नुकसान नहीं हुआ.

हालांकि इसके साथ कई दूसरे कारण भी शामिल होते हैं. जैसे अगर मरीज की उम्र ज्यादा है या उसे बीपी या शुगर जैसी बीमारियां हों, या फिर वो मोटापे का शिकार हो, तो बीमारी के गंभीर होने का डर ज्यादा रहता है.

किन देशों में दिखा क्या?
स्पेन, फ्रांस, इटली और ब्रिटेन ऐसे देश हैं, जहां के नागरिकों में विटामिन डी की भारी कमी देखी गई. और ध्यान दें तो पाएंगे कि ये वही देश हैं, जहां शुरुआत में कोरोना मामले काफी आए थे. साथ ही लाखों मौतें भी हुई थीं. अब भी इन देशों ने खुद को कोरोना-फ्री नहीं घोषित किया है यानी खतरा बना हुआ है. दूसरी ओर नॉर्वे, डेनमार्क, फिनलैंड, स्वीडन ऐसे देश हैं जहां पर विटामिन-डी लोगों का रक्षा कवच बन गया. वैसे ये देश जिस तरह की भौगोलिक स्थिति में हैं, यहां सूरज से उनका एक्सपोजर ज्यादा नहीं हो पाता. इसकी भरपाई के लिए इन देशों के नागरिक उस तरह की डायट लेते हैं जो विटामिन डी की पूर्ति कर सके. अमेरिका और चीन के लोगों में भी विटामिन-डी की भारी कमी पाई जाती है इसलिए वहां भी काफी जानें गईं.

यूवी किरणों की भी बात हो रही
वैसे विटामिन डी के बीच ऐसी भी चर्चा होती रही है कि सूरज की UV (अल्ट्रावायलेट) लाइट कोरोना वायरस (coronavirus) को पूरी तरह से खत्म कर सकती है. ये कितना सच या झूठ है, इसे समझने के लिए इन किरणों के बारे में समझते हैं. सूरज से 3 तरह की UV किरणें निकलती हैं. पहली है UVA. ये सीधे धरती तक पहुंचती है और शरीर की झुर्रियों के लिए जिम्मेदार होती है. दूसरी किरण है UVB. ये सीधे हमारे DNA को प्रभावित करती है. यही स्किन कैंसर का भी एक कारण है. सन्सक्रीन क्रीम या लोशन से इनसे काफी हद तक बचा जा सकता है.

एक तीसरा प्रकार भी है. ये है UVC जो कि जेनेटिक मटेरियल को मार सकता है चाहे वह वायरस हों या फिर इंसानी जेनेटिक मटेरियल. यानी ये बहुत ज्यादा खतरनाक हैं लेकिन हम तक पहुंचने से पहले ओजोन की परत इसे रोक देती है.

खतरनाक हैं ये किरणें
वैज्ञानिकों के यह जानने के बाद कि UVC कैसे जेनेटिक मटेरियल को खत्म कर पाती हैं, इस रोशनी का इस्तेमाल अस्पतालों में उपकरणों, ओटी को संक्रमण मुक्त करने में किया जाने लगा. अब तक चूंकि कोरोना का इलाज नहीं आ सका है इसलिए वैज्ञानिक ये भी मान रहे हैं कि इस बीच UVC की मदद से भी वायरस खत्म हो सकते हैं. यानी केवल UV नहीं, बल्कि UVC रेज से कोरोना वायरस को खत्म किया जा सकता है लेकिन चूंकि ये काफी खतरनाक है इसलिए सीधे इसके इस्तेमाल की इजाजत कहीं भी नहीं.

क्या कहता है WHO
वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) साफ कह रहा है कि UVC से बसों, अस्पतालों या उपकरणों को साफ किया जा सकता है लेकिन इंसानों के शरीर पर इसका एक्सपोजर बहुत ज्यादा खतरनाक हो सकता है. COVID-19 के बारे में ये कहता है कि कोई चाहे कितनी ही तेज धूप में कितनी ही देर खड़ा रहे, अगर वो संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आए तो उसे कोरोना हो ही जाएगा. सूरज की अकेली रोशनी से वायरस नहीं मरते हैं.

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