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वास्तु शास्त्र : ब्रह्म स्थान को खुला रखना है श्रेयष्कर, न करें भारी निर्माण

घर, कमरे या आंगने के मध्य में भारी सामान न रखें. वास्तुशास्त्र में ब्रह्म स्थान को हल्का रखने को कहा गया है. ब्रह्म स्थान भवन का मध्य भाग होता है. इसे भारी बनाने से संतुलन बिगड़ता है.

घर, कमरों और आंगन का जो मध्य भाग होता है उसे ब्रह्मा का स्थान माना जाता है. इस स्थान को स्वच्छ और हल्का रखें. इस स्थान पर भारी सामान रख देने या निर्माण कर देने से विश्व रचियता ब्रह्मा का निरादर माना जाता है. इससे घर परिवार में सहजता और सृजनात्मक गतिविधियों का ह्रास होता है. साथ ही शांति में कमी आती है.

घर में ऐसा हो तो परिवार में सुख सौख्य घटता है. रहने वालों के बीच दूरियां बढ़ती हैं. संबंधों में गरमाहट कम होती है. आंगन के मध्य ऐसा हो जाए तो घर में मेहमानों की आवक घट जाती है. चहल-पहल एवं रौनक कम होने लगती है.

वहीं कक्ष के मध्य में भारी सामान रख दिया जाता है तो वह कमरा अक्सर खाली पड़ा रहता है या रहने वालों को आराम प्रभावित रहता है. शयन में बाधा आती है. अनिश्चिता एवं बेचनी बढ़ती है. शयन कक्ष में शैया को मध्य में कभी न रखें. साथ ही इस बात का ध्यान रखें कि शैया कमरे के किसी भी कौने में पूरी तरह सटी न हो.

ब्रह्म स्थान में हवा का प्रबंध होना चाहिए. ब्रह्म स्थान में छत जितना उूंची होती है उतना अच्छा होता है. यहां दीवारों की अधिकता शुभ नहीं मानी जाती है. साथ ही इस स्थान पर नलकूप आदि की खुदाई भी शुभ नहीं होती है. यह स्थान समतल सपाट और खुला होना शुभकर होता है. इस स्थान का प्रयोग लोगों की मुलाकात और चर्चाओं के लिए किया जाना शुभ होता है.

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