EDUCATION

MP में अभी नहीं खुलेंगे प्राइमरी स्कूल, 6वीं से 8वीं पर फैसला जल्द, बोर्ड परीक्षा ऑफलाइन होगी

आपको बता दें कि मध्य प्रदेश में काेरोना के नए मामले फिर से बढ़ रहे हैं. इसको लेकर सरकार पूरी तरह सतर्क है. कोरोना गाइडलाइंस का सख्ती से पालन कराए जाने का निर्देश जिला प्रशासन को दिया गया है. 

भोपाल: मध्य प्रदेश में प्राइमरी स्कूल अभी नहीं खुलने जा रहे. एक स्थानीय अखबार के मुताबिक यह जानकारी स्कूल शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने दी है. हालांकि, कक्षा 6 से 8 तक के स्कूल खोलने के संबंध में जल्द ही फैसला लिया जाएगा. बच्चों के स्कूल नहीं खोले जाने के पीछे की वजह​ कोरोना के असर का अभी पूरी तरह समाप्त नहीं होना बताया गया है. 

आपको बता दें कि मध्य प्रदेश में काेरोना के नए मामले फिर से बढ़ रहे हैं. इसको लेकर सरकार पूरी तरह सतर्क है. कोरोना गाइडलाइंस का सख्ती से पालन कराए जाने का निर्देश जिला प्रशासन को दिया गया है. चूंकि छोटे बच्चे कोरोना संक्रमण से जल्दी प्रभावित हो सकते हैं, इसलिए सरकार उनके स्वास्थ्य को लेकर गंभीर है और फिलहाल प्राइमरी स्कूलों को खोलने का फैसला नहीं लिया है.

स्थितियों के नियंत्रित होने पर ही खुल सकेंगे प्राइमरी स्कूल
मध्य प्रदेश के स्कूल शिक्षी मंत्री इंदर सिंह परमार के मुताबिक, ”हालात को देखते हुए हर सप्ताह समीक्षा की जा रही है. स्थितियों के नियंत्रित होने पर ही क्लासेस खोले जाने पर फैसला लिया जाएगा. फिलहाल, छोटे बच्चों की ऑफलाइन क्लास खोलना संभव नहीं है.” मंत्री ने कहा कि इस सत्र की परीक्षा आयोजित कराना हमारी पहली प्राथमिकता है. इस संबंध में सरकारी और निजी स्कूलों के लिए गाइडलाइन जारी की गई है.

मंत्री परमार ने कहा कि 10वीं और 12वीं की परीक्षाएं ऑफलाइन ही होंगी, क्योंकि छात्रों के भविष्य का सवाल है. प्राइवेट स्कूलों को नॉन बोर्ड एग्जाम्स ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरह से कराने की छूट है. वे अपनी सुविधा के अनुसार परीक्षा के संबंध में निर्णय ले सकते हैं. सभी कक्षाओं की परीक्षाएं पूरी होने के बाद ही नए सत्र पर निर्णय लिया जाएगा.

प्राइवेट स्कूल मनमानी फीस नहीं वसूल सकेंगे: मंत्री परमार
इंदर सिंह परमार ने कहा कि प्राइवेट स्कलों की मनमानी रोकने के लिए पहले कोई नियम नहीं था. लेकिन, अब प्रावधान​ किए गए हैं कि निजी स्कूल मनमानी फीस न वसूल सकें. प्राइवेट स्कूल को फीस बढ़ाने के लिए पहले शासन से अनुमति लेनी होगी. अनुमति भी इस आधार पर दी जाएगी कि उन्हें फीस बढ़ाने का कारण बताना होगा. उचित कारण होने पर ही शासन की ओर से फीस बढ़ाने की अनुमति दी जाएगी. फीस वृद्धि की अधिकतम सीमा शासन ही निर्धारित करेगा.

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