Uttarakhand

बड़ी खबर : उत्तराखंड में जल्द शुरू हो सकती है चारधाम यात्रा! जानिए कैसे

पिछले साल कोरोना की पहली लहर के दौरान उत्तराखंड में चारधाम यात्रा (Chardham Yatra) को जुलाई में ​शुरू किया जा सका था और इस साल दूसरी लहर के प्रकोप के दौरान जून के दूसरे सप्ताह में इस पर बड़ा फैसला लिया जा सकता है.

देहरादून. हरिद्वार में हुए कुंभ के आयोजन को कोविड संक्रमण के लिहाज़ से सुपर स्प्रेडर कहे जाने की चर्चाओं के बीच चारधाम यात्रा (Chardham Yatra) पर रोक लगाई गई थी, लेकिन अब कोरोना फैलने की स्थितियों के मद्देनजर इसे फिर से शुरू किया जा सकता है. अधिकारियों के मुताबिक केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री के लिए चारधाम यात्रा को कुछ चुनिंदा जिलों के लिए खोला जा सकता है, जहां कोविड संबंधी हालात बेहतर पाए जाएंगे. इससे पहले इस साल श्रद्धालुओं के इस यात्रा को रोक दिया गया था और ​केवल पुजारियों को पूजा अर्चना संबंधी गतिविधियां कर पाने की अनुमति दी गई थी.

गढ़वाल के आयुक्त के साथ ही चार धाम देवस्थानम बोर्ड के चेयरमैन रविनाथ रमन के हवाले से टीएनआईई की खबर में कहा गया कि महामारी संबंधी स्थितियों पर नजर रखी जा रही है और जून के दूसरे हफ्ते में बोर्ड की बैठक के बाद इस बारे में फैसला किया जाएगा कि यात्रा शुरू की जाए या नहीं. ‘हम जल्दबाज़ी नहीं कर रहे हैं, बल्कि क्या हो सकता है, यह देख रहे हैं.’

कैसे शुरू हो सकती हैं यात्राएं?

रमन के मुताबिक कोरोना संबंधी स्थितियों को देखते हुए हो सकता है कि धाम जिस ज़िले में स्थित है, वहां के लोगों के लिए ही यात्रा की अनुमति दी जा सके या फिर उस तीर्थ से लगे गांवों के श्रद्धालुओं को. लेकिन यह सब तब ही तय होगा जब विश्वास हो कि संक्रमण कम हो रहा है. इससे पहले मई के महीने में ही उत्तराखंड के हाई कोर्ट ने कुंभ और चार धाम यात्रा आयोजन पर कहा था कि राज्य को अपनी भूलों से सबक लेना चाहिए लेकिन राज्य विडंबना का शिकार हो रहा है. अस्ल में, राज्य सरकार के एक मंत्री समेत कुछ भाजपा नेता प्रतिबंध के बावजूद तीर्थ यात्रा पर पहुंच गए थे.

क्या कह रहे हैं पिछले आंकड़े?

रिपोर्ट की मानें तो पिछले साल यह यात्रा 1 जुलाई को सिर्फ राज्य के लोगों के लिए शुरू हुई थी और जुलाई के आखिरी हफ्ते में उत्तराखंड के बाहर के श्रद्धालुओं के लिए. चूंकि पिछले साल भी कोरोना संक्रमण की लहर थी इसलिए 2020 में 4.2 लाख लोग इस यात्रा पर आए थे लेकिन 2019 में 38 लाख लोगों ने यह तीर्थ यात्रा की थी.

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