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Fixed Deposit पर नहीं मिल रहा अच्‍छा रिटर्न तो यहां लगाएं पैसा, दूर हो जाएगी आपकी टेंशन

एफडी पर कम ब्‍याज दर के इस दौर में निवेश अब ऐसे विकल्‍प की तलाश में हैं, जहां उन्‍हें अच्‍छे रिटर्न के साथ ही अपनी पूंजी की सुरक्षा भी मिल सके. इसके अलावा उनके पास लिक्विडिटी की सुविधा हो. डेट म्‍यूचुअल फंड्स एक अच्‍छा विकल्‍प साबित हो सकता है.

करीब पिछले दो साल से फिक्‍स्‍ड डिपॉजिट पर ब्‍याज दरें कम होने का दौर थमने का नाम नहीं ले रहा है. दूसरी ओर बढ़ती महंगाई भी आम आदमी की एफडी निवेश पर मिलने वाले रिटर्न को निगेट‍िव की ओर ले जा रही है. मतलब एफडी पर रिटर्न मिलने के बाद भी किसी भी चीज को खरीदने की क्षमता कम होती जा रही है. यही कारण है कि ऐसे निवेशक अब अपनी पूंजी को दूसरे विकल्‍प में निवेश कर अच्‍छा रिटर्न पाने की तलाश में हैं. उनकी तलाश एक ऐसे विकल्‍प की है, जो उन्‍हें अच्‍छे रिटर्न के साथ ही पूंजी की सेफ्टी और लिक्विडिटी की भी सुविधा दे.

सरकारी और कॉरपोरेट बॉन्‍ड व फंड्स इन्‍हीं विकल्‍पों में से एक हैं. इसके अलावा भी निवेशक अब डेट म्‍यूचुअल फंड कैटेगरी को भी एफडी के विकल्‍प के रूप में देख रहे हैं. इसके पहले एफडी विकल्‍प के तौर पर लिक्विड फंड्स निवेशकों के लिए रिटर्न और लिक्विडिटी के लिहाज से अच्‍छा विकल्‍प माना जाता था.

फायदेमंद विकल्‍प नहीं रहा एफडी

लेकिन, भारतीय रिज़र्व बैंक ने नीतिगत ब्‍याज दरों को कम रखा है और बैंकों व अन्‍य वित्‍तीय संस्‍थानों में पर्याप्‍त फंड्स उपलब्‍ध हैं. इस वजह से लिक्विड फंड्स पर रेट ऑफ रिटर्न्‍स में कमी आई है. खुदरा निवेशकों के लिए अब यह फायदेमंद विकल्‍प नहीं रहा है. इन्‍हीं बातों को देखते हुए हम आपको एफडी की जगह कुछ अन्‍य निवेश विकल्‍प के बारे में बता रहे हैं.

फ‍िक्‍स्ड मैच्‍योरिटी प्‍लान (FMP): चूंकि, फिक्‍स्‍ड मैच्‍योरिटी प्‍लान को तय मैच्योरिटी अवधि और तय कूपन रेट पर फाइनेंशियल इंस्‍ट्रूमेंट्स में निवेश किया जाता है, निवेशक काफी सटीकता से मिलने वाले रिटर्न का अनुमान लगा सकते हैं. वे पता लगा सकते हैं कि उनकी मैच्‍योरिटी वैल्‍यू क्‍या है और उन्‍हें कब ये रकम मिलेगी. हालांकि, इस तरह के फंड्स में ट्रांजैक्‍शन को लेकर कुछ समस्‍या आ सकती है.

रोल डाउन स्‍ट्रैटेजी: रोल डाउन स्‍ट्रैटेजी पर आधारित फंड्स ओपेन एंडेड फंड् हैं और इनकी लिक्विड‍िटी अच्‍छी है. लेकिन चूंकि, एसेट मैनेजमेंट कंपन‍ियां पुराने इन्‍वेस्‍टमें को लिक्विडेट कर फ्रेश इन्‍वेस्‍टमेंट करती रहती हैं, इसीलिए इनकी मैच्‍योरिटी वैल्‍यु और निवेश का अवधि का अनुमान लगाना मुश्किल होता है. इस फंड की वैल्‍युएशन पर आसानी एंट्री और एग्जिट से भी असर पड़ता है.

टार्गेट मैच्‍योरिटी गिल्‍ट इंडेक्‍स फंड्स: आमतौर पर टार्गेट मैच्‍योरिटी गिल्‍ट इंडेक्‍स फंड्स का बहुत हद तक अनुमान लगाया जा सकता है. इस तरह के फंड्स को मुख्‍य तौर पर सरकारी सिक्‍योरिटी में निवेश किया जाता है. मैच्योरिटी अवधि के अंदर ही सिक्‍योरिटी भी मैच्‍योर हो जाती है. इस प्रकार टार्गेट मैच्‍योरिटी ग‍िल्‍ट फंड्स को कम जोखिम वाला विकल्‍प माना जाता है. मैच्‍योरिटी से पहले भी इस तरह के फंड्स से ट्रांजैक्‍शन करने की सुविधा मिलती हैं.

इन निवेश फंड्स में जोखिम का ध्‍यान रखें

म्‍यूचुअल फंड्स में निवेश कैपिटल इन्‍वेस्‍टमेंट और इसीलिए यह फिक्‍स्‍ड डिपॉजिट की तुलना में अधिक जोखिम वाला विकल है. टार्गेट मैच्‍योरिटी गिल्‍ट इंडेक्‍स फंड्स 6-7 साल बाद दोबार इन्‍वेस्‍टमेंट के समय थोड़ा अधिक जोखिम वाला बन जाता है क्‍योंकि उस दौरान नई सिक्‍योरिटीज का कूपन रेट कम हो. इसके अलावा निवेशकों पर मैच्‍योरिटी की तारीख से पहले विड्रॉल के समय उतार-चढ़ाव का भी असर पड़ सकता है.

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